"यह मेरा प्रिय पुत्र है, जिससे मैं बहुत प्रसन्न हूँ; इसकी बात सुनो।" - मत्ती 17:5
आज का चिंतन (हिंदी)
यीशु अपने तीन शिष्यों- पतरस, याकूब और योहन को एक ऊँचे पर्वत पर ले गए। वहाँ उनका रूप बदल गया। उनका चेहरा सूर्य के समान चमकने लगा और उनके वस्त्र प्रकाश की तरह उज्ववल हो गए। मूसा और एलियाह भी प्रकट हुए और यीशु से बातें करने लगे। बादल में से आवाज आई-"यह मेरा प्रिय पुत्र है, इससे सुनो।"
यह दृश्य शिष्यों के लिए एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव था। यीशु ने उन्हें अपनी महिमा की झलक दिखाई, ताकि वे दुःख और कूस के मार्ग में भी उस पर विश्वास बनाए रखें।
जीवन में लागू करने के लिए
प्रतिदिन प्रार्थना और मौन में समय बिताएँ हम भी प्रभु की उपस्थिति और शांति का अनुभव करेंगे।
जब जीवन कठिन लगे, तब इस पर्वत अनुभव को याद रखें- प्रभु हमेशा हमारे साथ हैं।
प्रभु की वाणी को सुनें और उस पर चलें वही हमें सही मार्ग दिखाती है।
दूसरों को प्रभु की रोशनी और प्रेम का अनुभव कराएँ।
प्रभु की वाणी सुनो और उसका अनुसरण करो - यही वह मार्ग है जो हमें सच्चे जीवन की ओर ले जाता है।
दूसरों के लिए मसीह के प्रेम और महिमा का प्रकाश बनो।
हे प्रभु यीशु.
आपने पर्वत पर अपनी महिमा प्रकट की
ताकि हम आपके दित्य प्रेम और सत्य को पहचान सकें। हमें अपनी वाणी सुनने और उस पर चलने की कृपा दें। आमेन।
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